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From the category archives:

संस्कृति

बेलवन में लक्ष्मी जी की कृपा

by neeraj.brajwasi@gmail.com on January 12, 2013

महल से खुरच लिए सोने-चांदी के सिक्के

by neeraj.brajwasi@gmail.com on December 31, 2012

पांच हजार बंदर, घुड़की से कर रहे अंदर

by neeraj.brajwasi@gmail.com on December 16, 2012

इस्कॉन के सुरक्षा प्रभारी हिरासत में

by neeraj.brajwasi@gmail.com on December 10, 2012

विकास की बाट जोह रहीं विरासत

by neeraj.brajwasi@gmail.com on December 3, 2012

नए साल के लिए गिरिराज जी ‘बुक’

by neeraj.brajwasi@gmail.com on November 29, 2012

कान्हानगरी में हावी हो रही है लपका संस्कृति

by neeraj.brajwasi@gmail.com on November 29, 2012

कान्हा के द्वार, श्रद्धा अपार

by neeraj.brajwasi@gmail.com on November 29, 2012

स्वामी बाबा: मेला में मौज और कुंड में आस्था

by neeraj.brajwasi@gmail.com on November 24, 2012

बाल मेला में इंद्रधनुषी छटा

by neeraj.brajwasi@gmail.com on November 24, 2012

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  • वृन्दावन टुडे क्या है ?

    इस वेबसाइट का उद्देश्य है सारे दुनिया स्थित भक्त लोगों को वृन्दावन का दैनंदिन जीवन लाना । वृंदावन की पारमर्थिक जीवनी -- उसके आश्रम, मंदिर, त्यौहारें, भागवत प्रवचन, रासलीला आदि, और दूसरा, वृन्दावन की समस्याएं -- पर्यावरण और पवित्कार परिवेश का अवक्रमण, नगरीकरण, जल-वायु-आकाश प्रदूषण इत्यादि । यह सब खबरें यहां मिलेंगी ।

    अपनी संस्था या मंदिर का समाचार भेजें !

    वृंदावन की परिस्थिति के बारे में आप के मंतव्य व्यक्त करें ।

    हम एक साथ ब्रज का माहात्म्य प्रचार करेंगे और उसकी पवित्रता और भजनोपयोगिता रक्षा करेंगे ।

    जै श्री राधे श्याम !

  • टिप्पनियां

    • kailash dadhich on Second post
    • bidyaram on बरसाने में बजत बधाई, रानी कीरत कन्या जाई
    • a k sinha on जिलाधिकारी मथुरा ने ब्रज फाण्डेशन की टीम को प्रदान किया अवार्ड
    • a k sinha on Second post
    • a k sinha on Second post
  • श्रीवृन्दावनमहिमामृतम् 1.3

    श्रीमद्वृन्दाटवि मम हृदि
    स्फोरयात्मस्वरूपम्
    अत्याश्चर्य-प्रकृति-परमा-
    नन्द-विद्या-रहस्यम् ।
    पूर्ण-ब्रह्मामृतमपि ह्रिया
    वाभिधातुं न नेति
    ब्रूते यत्रोपनिषद इहा-
    त्रत्यवार्ता कुतस्त्या ?॥१.३॥


    हे श्रीमद् वृन्दाटवि ! अति आश्चर्यजनक स्वाभाविक परमानन्द-विद्या-रहस्य-युक्त जो आपका स्वरूप है, उसकी स्फूर्ति मेरे हृदय में कराओ । पूर्ण ब्रह्मामृत के ही वर्णन करने में लज्जित होकर जब उपनिषद् नेति नेति पुकार रही हैं, तब इस वृन्दावन की महिमा विषय में और क्या कहा जाये ? ॥३॥
  • वृंदावन टुडे की सहायता कीजिये

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    धन्यवाद ! जै श्री राधे श्याम !!

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